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महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज के ऐतिहासिक निवास कक्ष को तोड़ने के विरोध में एकजुट हुए सेवक, कहा धरोहर को नहीं होने देंगे नष्ट

रिपोर्ट – सैयद ईनाम उद्दीन

सिल्क टीवी/भागलपुर (बिहार) : भागलपुर में भारत का प्राचीन इतिहास शामिल है। यहां बौद्ध शिक्षा देने वाले प्राचीन विश्वविद्यालय से लेकर कई ऐतिहासिक धरोहर हैं। जिसमें गंगा नदी के तट पर स्थित कुप्पाघाट भी शामिल है। मान्यताओं के अनुसार, संत महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज ने इस गुफा में कई महीने चटाई पर ध्यान में बिताए थे।

कुप्पाघाट में खूबसूरत बगीचे भी हैं, जिसका धर्म ग्रंथों में उल्लेख किया गया है। कई लोगों का मानना है कि भगवान बुद्ध का जन्म इसी क्षेत्र में हुआ था। कुप्पाघाट में प्रवेश करते ही आपको आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति होने लगेगी। वहीं महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज के धरोहर रुपी निवास कक्ष को सौंदर्यीकरण के लिए तोड़ा जा रहा है। जिससे संतमत समाज से जुड़े लोग काफी दुखी हैं। भक्तों ने सोमवार को एक स्वर में कहा कि महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज का कक्ष जैसा था, उसी प्रकार रहने दिया जाय।

सेवकों ने गुरु निवास कक्ष के स्वरूप में परिवर्तन के सवाल पर इसे प्राचीन धरोहर बताते हुए घोर आपत्ति जताई है। बता दें कि गुरु निवास कक्ष तोड़े जाने को लेकर सत्संगी मनोज कुमार ने डीआईजी को आवेदन दिया है। जिसके बाद बरारी थाना पुलिस ने तत्काल निर्माण कार्य को रुकवा दिया है। वहीं संजय बाबा, लाल बहादुर, अमृत कुमार और परमानंद बाबा ने कहा कि यहां काफी वर्षों तक महर्षि मेंहीं रहे थे। उन्‍होंने यहां साधना की, प्रवचन किया। वे जिस कक्ष में रहते थे, उसे देखने आज भी काफी संख्‍या में लोग आते हैं। लेकिन षड्यंत्र के तहत आश्रम के ही कुछ लोग इसे आकर्षक बनाने के नाम पर तोड़ना चाहते हैं।

जो संतमत समाज से जुड़े लोगों की आस्था के विपरीत है। संजय बाबा ने बताया कि पिछ्ले दिनों अभयकांत झा की अध्यक्षता में आश्रम परिसर में गुरु निवास की सुंदरता और विकास के लिए बैठक कर कई प्रस्ताव लाया गया। महासभा के पदाधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद निर्णय हुआ था, कि गुरु निवास की मूल संरचना में किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं होगा, और सभी कार्य महासभा के निगरानी में किया जाएगा। इसके बावजूद महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज के आश्रम स्थल को क्षतिग्रस्त किया गया।

गौरतलब हो कि प्रत्येक वर्ष अखिल भारतीय संतमत सत्संग महासभा के अहवान पर कुप्पाघाट में देशभर से संत और श्रद्धालु आते हैं, जो महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज के निवास भवन का दर्शन भी करते हैं। भक्तों ने बताया कि गुरु निवास भवन को यथावत स्थिति में रखते हुए पुनर्निर्माण कार्य नहीं किए जाने की शिकायत भारत सरकार, राज्य सरकार, पुरातत्व विभाग, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन से की गई है।

जबकि सेवकों का कहना है कि जिस कक्ष में महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज विश्राम करते थे और बरामदे पर बैठकर भक्तों को दर्शन देते थे। उस ऐतिहासिक भवन को किसी भी सूरत में तोड़ने नहीं दिया जाएगा।

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