Home भागलपुर भीखनपुर में क्विज प्रतियोगिता का हुआ आयोजन

भीखनपुर में क्विज प्रतियोगिता का हुआ आयोजन

रिपोर्ट – सैयद ईनाम उद्दीन

सिल्क टीवी/भागलपुर (बिहार) : भागलपुर भीखनपुर गुमटी नंबर तीन स्थित जामा मस्जिद के समीप रविवार को इस्लामिक क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन अंजुमन फलाहुल मुस्लिमीन कमेटी के बैनर तले हुआ।

मरहबा क्विज प्रतियोगिता का उदघाटन खानकाह आलिया शहबाजिया के प्रधान शिक्षक मुफ्ती फारूक आलम अशरफी, भीखनपुर जामा मस्जिद के इमाम कारी नसीम अहमद अशरफी, मुफ्ती फैय्यूम, हाफिज मुकर्रम शाहीन, आयोजन सचिव बबलू खान और आगत अतिथियों ने किया। प्रतियोगिता में भागलपुर के विभिन्न इंग्लिश और हिंदी मीडियम स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।

आयोजन सचिव बबलू खान ने बताया कि प्रतियोगिता में कक्षा एक से आठवीं तक के बच्चों ने भाग लिया। इसके अलावा एक प्राइमरी ग्रुप भी बनाया गया था, जिसमें नर्सरी और केजी के बच्चों को शामिल किया गया। उन्होंने जानकारी दी कि बच्चों में दीनी तालीम की रुचि पैदा करने के उद्देश्य से पिछले 4 वर्षों से कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वालों के अलावा प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी स्टूडेंट्स को पुरस्कृत किया जाता है। इधर जामा मस्जिद के सदर खुर्शीद आलम खां और सचिव तनवीर उल्लाह अंसारी ने बताया कि यह प्रोग्राम दीनी तारीख को जानने का अहम जरिया है। जबकि मंजर अशरफी, हाफिज मुतलिब और महताब आलम ने कहा कि इस तरह का आयोजन समाज के लिए प्रेरणादायक है।

मौके पर मौलाना फारूक आलम अशरफी ने बताया कि तरक्की का रास्ता शिक्षा से होकर गुजरता है। इसलिए सभी अभिभावक बच्चों की शिक्षा पर सबसे ज्यादा जोर दें। क्योंकि वर्तमान समय में धार्मिक शिक्षा के साथ दुनियावी तालीम भी जरूरी है। प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल के सदस्यों ने कुरान शरीफ की आयत, अंतिम पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब, इस्लामी शिक्षा, घर-परिवार में महिलाओं के अधिकार, रिश्तेदारों और पड़ोसियों के हुकूक, माता-पिता के फर्ज समेत कई बिंदुओं पर बच्चों से सवाल पूछे। जिसका उत्तर बच्चों ने अपने बेसिक नॉलेज के अनुसार दिया।

इधर मौलाना नसीम अहमद अशरफी ने कहा कि शिक्षा और अच्छे संस्कार मनुष्य के सफल जीवन का मुख्य आधार है। साथ ही कहा कि संस्कार के बिना शिक्षा अधूरी है। उन्होंने बताया कि शिशु की प्रथम पाठशाला मां की गोद होती है।

आयोजन सचिव बबलू खान ने कहा कि इस्लाम धर्म में शिक्षा का सर्वाधिक महत्व है। वहीं कार्यक्रम को सफल बनाने में कमेटी के सदस्यों ने अहम भूमिका निभाई।

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