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भारी बारिश के बाद फिर उफनाई गंगा, तटवर्ती इलाके में कहर जारी, कटाव की जद में आई इंग्लिश फरका गांव की पीसीसी सड़क….

रिपोर्ट – सैयद ईनाम उद्दीन

सिल्क टीवी/भागलपुर (बिहार) :भागलपुर बाढ़ की मार झेल कर अभी उभरा भी नहीं था कि एक बार फिर गंगा ने कहर बरपाना शुरू कर दिया। वहीं सबौर प्रखंड का इंग्लिश गांव गंगा की आगोश में चला गया है। गांव को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग से लेकर पुल पुलिया तक पानी में समां गया।

साथ ही इंग्लिश फरका की करीब सौ मीटर पीसीसी सड़क और एक दर्जन घर भी गंगा कटाव की भेंट चढ़ गयी। हालांकि इस दौरान किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। बताया जा रहा है कि कटाव की आशंका को देखते हुए ग्रामीण पहले ही मकान खाली कर चुके थे। वहीं घोषपुर से लेकर इंग्लिश फरका तक लगभग दो किलोमीटर ग्रामीण पीसीसी सड़क गंगा कटाव की जद में है। कटाव को लेकर ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।

जबकि सड़क कटाव के कारण घोषपुर से इंग्लिश फरका का संपर्क भंग हो गया है। ग्रामीण संजीत कुमार, अमृतांशु तिवारी और जयप्रकाश यादव ने बताया कि बारिश और तेज हवा से गंगा के पानी का दबाव बढ़ने लगा जिससे अचानक मंगलवार की सुबह कटाव शुरू हो गया। लोगों ने कहा कि सबसे पहले पीसीसी सड़क का कटाव हुआ। उसके बाद घर भी कटने लगा। दो माह पूर्व गंगा में बाढ़ आ जाने के कारण कटाव बंद था लेकिन बाढ़ खत्म होते ही और गंगा का पानी घटने के साथ कटाव तेज हो गया।

पीड़ित लोगों ने बताया कि इंग्लिश फरका वार्ड नंबर 3 के समीप एक दर्जन घर गंगा कटाव की जद में है। इधर इंग्लिश फरका के ग्रामीण पीसीसी सड़क कटाव की सूचना पर बाढ़ नियंत्रण विभाग के एसडीओ रमेश कुमार जायजा लेने पहुंचे। इस दौरान ग्रामीणों ने एसडीओ का घेराव किया और बचाव कार्य को लेकर खरी-खोटी सुनाई। ग्रामीणों ने कहा कि बाढ़ आने के पूर्व बालू भरी बोरी ठीक ढंग से नहीं डलवाने के कारण कटाव हो रहा है। बताया कि 15 हजार बालू भरी बोरी तैयार की गई थी जो रखी रह गई।

ग्रामीणों की मानें तो यदि कटाव स्थल के पास बोल्डर, बांस-बल्ली तार लगा दिया गया होता तो आज यह स्थिति ही नहीं होती। वहीं सीओ अजीत कुमार झा ने बताया कि कटाव क्षेत्र का जायजा लेने के बाद आसपास के घरों को खाली करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि गंगा कटाव की जानकारी बाढ़ नियंत्रण विभाग को दे दी गई है। गौरतलब हो कि सबौर प्रखंड क्षेत्र के बाबूपुर से लेकर ममलखा तक वर्षों से गंगा कटाव हो रहा है। जिससे किसानों की हजारों एकड़ जमीन गंगा में समा गयी है।

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