Home बिहार बौद्ध विरासत पर शोध वर्त्तमान समय की मांग: प्रो. आशा शुक्ला

बौद्ध विरासत पर शोध वर्त्तमान समय की मांग: प्रो. आशा शुक्ला

‘थेरवाद बौद्ध धर्म और ब्राह्मण-शब्दावली’ विषय पर हेरीटेज सोसाइटी के बौद्ध विरासत शोध संस्थान तथा डॉ. बी. आर. अंबेडकर सामाजिक अध्ययन विश्वविद्यालय के लार्ड बुद्धा एवं कल्चरल हेरीटेज स्टडीज चेयर के संयुक्त तत्वावधान में विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। आयोजन में कलकत्ता विश्वविद्यालय के बौद्ध अध्ययन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. उज्ज्वल कुमार मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित थे तथा बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के पाली एवं बौद्ध अध्ययन विभाग के अध्यक्ष प्रो. विमलेन्द्र कुमार द्वारा किया गया।
आयोजन की संरक्षिका तथा डॉ. बी. आर. अंबेडकर सामाजिक अध्ययन विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. आशा शुक्ला द्वारा उद्घाटन वक्तव्य में बौद्ध विरासत एवं उसकी महत्ता पर प्रकाश डाला गया। साथ ही वर्त्तमान समय में बुद्ध के शांति उपदेशों की महत्ता को भी कुलपति द्वारा रेखांकित किया गया। उन्होंने विश्वविद्यालय एवं हेरीटेज सोसाईटी के संयुक्त प्रयासों के उपलब्धियों को भी देश एवं विदेश से जुड़े प्रतिभागियों के मध्य साझा भी किया। पीठ की आचार्या प्रो. नीरू मिश्रा द्वारा आमंत्रित सभी विद्वानों का परिचय वक्तव्य के साथ ही सम्मानित सदस्यों एवं प्रतिभागियों को भी दोनों संस्थानों की ओर से स्वागत किया गया।

अपने वक्तव्य में प्रो. मिश्रा ने यह भी बताया की यह सोचने का विषय है कि जिस बौद्ध धर्म का प्रादुर्भाव भारत में हुआ वह विदेशी भूमि पर पल्लवित हो रहा है। जरुरी है उनके लिए पर्यटन एवं शोध हेतु अनुकूल वातावरण बना कर सम्बंधित विषयों के शोधार्थियों एवं विशेषज्ञों को इस दिशा में आगे लाने की । मुख्य वक्ता डॉ. उज्ज्वल कुमार द्वारा अपने व्याख्यान में थेरवाद बौद्ध धर्म और ब्राह्मण-शब्दावली पर विस्तार से पावर पॉइंट प्रजेन्टेशन द्वारा प्रकाश डाला गया। शब्दावली विज्ञान वह विधा है जो पारिभाषिक शब्दों के विकास तथा अन्य पहलुओं, जैसे कि अवधारणाओं, का अध्ययन करती है। प्रस्तुत व्याख्यान का उद्देश्य बुद्ध द्वारा प्रयुक्त शब्दावली के पद्धति पर प्रकाश डालना साथ ही विशेष रूप से थेरवाद बौद्ध-धम्म में प्रयुक्त ब्राह्मण-शब्दावली अर्थात् मुख्य रूप से ब्राह्मण-धर्म में प्रयुक्त होने वाले शब्दों जैसे, देव, ब्राह्मण, वेद, योग, आत्मा आदि का जिस संदर्भ में प्रयोग किया गया है उस पर विचार करना तथा शोध हेतु लोगो जो प्रेरित करना। व्याख्यान इस बात को भी रेखांकित किया कि बुद्ध ने भारतीय शब्दकोश में कुछ नवीन शब्दों को स्थापित करने के साथ ही अनेक कर्मकांडीय अनुष्ठान वाले शब्दों को नैतिक व्यवहार वाले शब्दों में बदलते हुए प्रयोग में लाये।

डॉ. कुमार ने यह भी बताया कि गायत्री मन्त्र का सम्बंधित मन्त्र बौद्ध धर्म में सावित्री मंत्र कहलाया। बुद्ध ने सबसे ज्यादा उपदेश श्रावस्ती में दिए। सत्र की अध्यक्षता कर रहे विद्वान वक्ता प्रो. विमलेन्द्र कुमार द्वारा व्याख्यान से जुड़े कई बिंदुओं को भी उठाया गया, जिसमें उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि पाली में प्रयुक्त शब्दों को तत्कालीन समय एवं समाज के वर्त्तमान में व्याख्या करने की जरूरत है। तभी उसके मौलिक अर्थों की वैज्ञानिक व्याख्या की जा सकती है। प्रो. कुमार ने इस आयोजन हेतु संस्थान एवं पीठ को बधाई भी दिया तथा ऐसे आयोजनों को अनवरत कराने की सलाह भी दी। साथ ही उन्होंने मुख्य वक्ता के व्याख्यान की सराहना भी की। धन्यवाद ज्ञापन हेरीटेज सोसाईटी के महानिदेशक डॉ. अनन्ताशुतोष द्विवेदी द्वारा किया गया। अपने वक्तव्य में डॉ. द्विवेदी ने शोधार्थी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थीयों, अध्यापकों एवं विरासत प्रेमियों के लिए भी इस व्याख्यान को उपयुक्त बताया। सत्र का संचालन बौद्ध विरासत शोध संस्थान के निदेशक आजाद हिन्द गुलशन नन्दा द्वारा किया गया। इस आयोजन में दोनों संस्थाओं के कई सदस्यों के आलावा देश एवं विदेश से अनेकों प्रतिभागियों ने भाग लिया। सम्मिलित सदस्यों को प्रतिभागिता प्रमाणपत्र भी ऑनलाइन उपलब्ध कराया गया।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments