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बैंकों के निजीकरण की नीति के विरोध में UFBU ने केंद्र सरकार के खिलाफ देश भर में किया हल्ला बोल, धरना प्रदर्शन के बीच बैंको में लटका रहा ताला…..

रिपोर्ट – रवि शंकर सिन्हा

सिल्क टीवी भागलपुर (बिहार) : केन्द्र सरकार द्वारा बैंकों के निजीकरण की नीति के विरोध में यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन की ओर से किया जाने वाला दो दिवसीय बैंक हड़ताल गुरुवार से शुरू हो गया, जिसको लेकर एसबीआई समेत सार्वजनिक क्षेत्र के तमाम बैंकों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। यूएफबीयू के आवाह्न पर कई बैंक यूनियन की ओर से बैंकों के समक्ष धरना प्रदर्शन और केंद्र सरकार के खिलाफ हल्ला बोल किया गया।

इस दौरान खंजरपुर स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया जोनल ऑफिस के समक्ष एसबीआई के यूनियन की ओर से धरना दिया गया, जहां अपनी मांगों के समर्थन बैंकर्स ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए निजीकरण की नीति पर अविलंब रोक लगाने की मांग की। साथ ही कहा कि यदि बैंकों का निजीकरण हुआ, तो इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर पड़ेगा। एसबीआई यूनियन भागलपुर इकाई के डीजीएस अरुण कुमार के नेतृत्व में एसबीआई आंचलिक कार्यालय भवेश भवन के समक्ष धरना प्रदर्शन करते हुए बैंक कर्मियों ने सरकार से जनहित और कर्मचारी के साथ देश हित में निजीकरण समेत तमाम जनविरोधी नीतियों को वापस लेने की मांग की।

डीजीएस अरुण कुमार ने कहा कि देश के विकास के साथ ग्राहकों के पैसे की सुरक्षा और आर्थिक उन्नति के लिए राष्ट्रीयकृत बैंकों की अहम भूमिका है, जो निजीकरण के बाद असुरक्षित हाथों में चली जाएगी। वहीं इस दौरान इंडियन बैंक और बैंक ऑफ़ इंडिया ज़ोनल कार्यालय के समीप बैंक यूनियन की ओर से प्रदर्शन रैली निकाली गयी. जो शहर के विभिन्न मार्गो और चौक चौराहों से होकर अलग अलग बैंको के जोनल कार्यालय तक पहुंचा, और अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की. इंडियन बैंक बिहार झारखण्ड के महासचिव संजय कुमार लाठ और एसबीआई यूनियन के अरुण कुमार सिंह ने कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंको के निजीकरण से गरीबों, किसानों,

और बैंको में जमा जनता की गाढ़ी कमाई पूंजीपतियों के हाथ में चली जाएगी, मुद्रा लोन समेत जनहित के कई योजनाएं प्रभावित हो जाएंगी. उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने अगर संसद में बैंकिंग अधिनियम संशोधन विधेयक 2021 को शीतकालीन सत्र में पेश करने और निजीकरण के फैसले को वापस नहीं लिया तो आने वाले दिनों में बैंककर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर हो जाएंगे. संजय लाठ ने कहा कि गुरुवार को सभी बैंकों की हड़ताल के कारण जिले में 5 सौ करोड़ से अधिक का लेनदेन और व्यवसाय प्रभावित हुआ है.

साथ ही कहा कि पिछले दिनों 700 से अधिक निजी बैंक बंद हो चुके हैं, जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक मुनाफे में होने के बाद भी सरकार इन बैंकों का निजीकरण करना चाहती है, जो राष्ट्रहित में नहीं है. इसके अलावा यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, यूको बैंक, ग्रामीण बैंक, बैंक ऑफ़ बड़ोदा, समेत तमाम राष्ट्रीयकृत बैंक के समक्ष अलग अलग तरह से सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और नारेबाजी करते हुए निजीकरण के फैसले पर रोक लगाने की मांग की गई. साथ ही बैंक बचाओ-देश बचाओ के नारे के साथ बैंकों के निजीकरण का विरोध जारी रहा

वहीं बैंक शाखाएं बंद होने से ग्राहकों की परेशानी बढ़ गई है, जबकि भागलपुर के विभिन्न बैंक की एटीएम सेवा भी बंद रहीहालांकि आनलाइन लेन-देन सेवा सुचारू रूप से जारी रहा। हड़ताल के दौरान बैंक यूनियन के अरविंद कुमार रामा, सुनील कुमार पाठक, ए पी सिंह, तारकेश्वर घोष, अभिषेक कुमार सिंह, नकुल रजक, सुनिल कुमार शर्मा, दीपक कुमार, अहमद हसन समेत काफी संख्या में अलग जगहों पर विभिन्न बैंकों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने विरोध व्यक्त किया।

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