कृषिभागलपुर

बीएयू में प्रसार परिषद खरीफ की दो दिवसीय बैठक आयोजित, विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित कृषि संदेश का अतिथियों ने किया विमोचन

रिपोर्ट – रवि शंकर सिन्हा

सिल्क टीवी भागलपुर (बिहार) : भागलपुर के सबौर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय सभागार में 22वीं प्रसार परिषद खरीफ की दो दिवसीय बैठक बुधवार को आयोजित हुई। कार्यक्रम का उद्घाटन सभी मंचासीन अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।

इस दौरान बीते छह माह के दौरान विश्वविद्यालय के प्रसार निदेशालय द्वारा किए कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए उपलब्धियों पर चर्चा की गई। वहीं बैठक में सभी कृषि विज्ञान केंद्रों के संबंधित प्रधान वैज्ञानिकों द्वारा प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया, जबकि खरीफ 2022 के लिए किसान उपयोगी कार्य योजना पर भी मंथन किया गया।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए बिहार कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अरुण कुमार ने सभी डीन, डायरेक्टर और विभागाध्यक्षों को आवश्यक दिशा निर्देश भी दिया। कुलपति ने कहा कि कृषि विकास की दिशा में किए जा रहे उपयोगी कार्यों में जहां भी कुछ कठिनाइयां हो उसे तत्काल दूर किए जाएं, और किसानों की समस्या को सूचीबद्ध कर उसके निदान की दिशा में ठोस कार्य योजना तैयार की जाय।

कुलपति ने कहा कि खेसारी, सोयाबीन, ईख और आलू की खेती के क्षेत्र विस्तार को लेकर शोध प्रारूप तैयार करने की जरूरत है। जबकि चावल के शोध में फिलीपींस के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त संस्थान ईरी के साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी करार करने की जरूरत पर कुलपति ने बल दिया।

इस दौरान मंचासीन अतिथियों ने संयुक्त रूप से बीएयू द्वारा प्रकाशित कृषि संदेश का विमोचन किया, जिसमें अतिथि के रूप में मेरठ के सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय एवं प्रौद्योगिकी के पूर्व निदेशक डॉ. ओम प्रकाश सिंह, इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट के शिक्षा हेड डॉ. गोपेश तिवारी और वाराणसी इरी-इसार्क के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह शामिल रहे।

कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा पढ़े जा रहे प्रगति प्रतिवेदन और आगे की योजनाओं पर चर्चा के दौरान अतिथियों ने विश्वविद्यालय में चल रही प्रसार परिषद की बैठक की कार्रवाई का मूल्यांकन कर अपना अनुभव साझा किया और कई आवश्यक सुझाव भी दिए। बैठक में प्रगतिशील किसान पटना की पूनम कुमारी, सहरसा के प्रसनजीत कुमार और मुजफ्फरपुर के आनंद कुमार ठाकुर ने भी अपनी बात रखी।

इधर स्वागत सम्बोधन के दौरान निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. आर. के. सोहाने ने कहा कि वर्ष में दो बार खरीफ और रबी को लेकर प्रसार परिषद की बैठक की जाती है, जिसमें बीते 6 माह की उपलब्धियों की जानकारी देते हुए आगे की कार्य योजना तैयार की जाती है। उन्होंने कहा कि कृषि विकास की दिशा में प्रसार निदेशालय अपने सभी कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि कॉलेजों के माध्यम से राज्य के 25 जिलों में विश्वविद्यालय द्वारा विकसित किए गए नए प्रभेद और तकनीकी को पहुंचाने का काम कर रहा है।

जिससे काफी संख्या में किसानों को इसका लाभ मिल रहा है। डॉ. आर. के. सोहाने ने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र के बेहतर क्रियाकलापों के बल पर ही बिहार मशरूम उत्पादन में अव्वल स्थान पर पहुंच गया, जबकि निकरा परियोजना फेज़ दो के तहत राज्य के पांच कृषि विज्ञान केंद्र शामिल हैं। इसके अलावा नारी और आर्या प्रोजेक्ट का भी सफलतापूर्वक संचालन किया जा रहा है, जिसके कारण बिहार में कृषि से जुड़े लोगों की आजीविका में काफी सुधार आया है।

निदेशक प्रसार शिक्षा ने कहा कि वैश्विक महामारी कोरोना के दौरान भी कृषि प्रसार की दिशा में ऑनलाइन ई-चौपाल और ई-ट्रेनिंग का सफलतापूर्वक संचालन किया गया था, जिसका किसानों को काफी लाभ हुआ है। वहीं विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. शशिकांत ने कहा कि बैठक में तकनीकी सत्र के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र जहानाबाद, गया, खगड़िया सहित अन्य केवीके के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान ने प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन बीएयू सामुदायिक रेडियो की आर जे अनु कुमारी ने किया।

मौके पर विश्वविद्यालय के कृषि अधिष्ठाता डॉ. रेवती रमन सिंह, निदेशक शोध डॉ. पी. के. सिंह, निदेशक छात्र कल्याण सह निदेशक प्रशासन डॉ. राजेश कुमार, डीन पीजी आर. पी. शर्मा, बिहार कृषि कॉलेज सबौर के प्राचार्य डॉ. एस.एन. सिंह, के अलावा कृषि कॉलेजों के प्राचार्य, कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रधान समेत काफी संख्या में शिक्षक एवं वैज्ञानिक मौजूद रहे।

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