कृषिभागलपुर

बिहार कृषि विश्वविद्यालय में फसल सुधार को लेकर चलाए जा रहे सभी अनुसंधान कार्यक्रम काफी सराहनीय : एग्रोनॉमिस्ट डॉ. मंगला राय

रिपोर्ट – रवि शंकर सिन्हा

सिल्क टीवी भागलपुर (बिहार) : सिल्क टीवी भागलपुर (बिहार) : भागलपुर के सबौर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय के मुख्य सभागार में गुरुवार को 23वीं शोध परिषद (खरीफ 2022) की दो दिवसीय बैठक प्रारंभ हुई, जिसकी अध्यक्षता बीएयू के कुलपति डॉ. अरुण कुमार ने की।

इस दौरान मुख्य अतिथि सह विशेषज्ञ के रूप में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्व महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान परिषद के सचिव डॉ. मंगला राय, डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा समस्तीपुर के सह निदेशक अनुसंधान डॉ. एन. के. सिंह एवं संयुक्त कृषि निदेशक भागलपुर मंडल डॉ. अरुण कुमार ने बैठक में अपनी बात रखी, जबकि इसके अलावा बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों से आए प्रगतिशील किसानों ने भी हिस्सा लिया।

वहीं अपने सम्बोधन में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्तर के प्रख्यात एग्रोनॉमिस्ट डॉ. मंगला राय ने कहा कि बिहार कृषि विश्वविद्यालय में फसल सुधार को लेकर चलाए जा रहे सभी अनुसंधान कार्यक्रम काफी सराहनीय है। उन्होंने कहा कि खासकर डॉ. मन्केश कुमार द्वारा कतरनी की लंबाई छोटी करने वाले अनुसंधान निश्चय ही काबिले तारीफ है।

साथ ही उन्होंने बैठक में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि शोध कार्य से जुड़े सभी वैज्ञानिकों को अनुसंधान कार्य में आ रहे व्यवधान को दूर कर इसे सरल बनाने का प्रयास करना आवश्यक है, जिससे लक्ष्य प्राप्ति का मार्ग सुलभ होने लगता है।

वहीं विश्वविद्यालय के सभी अधिष्ठाता, निदेशक, कुलसचिव, विभिन्न कृषि महाविद्यालयों के प्राचार्य, क्षेत्रीय अनुसंधान निदेशक, कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रधान और विभिन्न विभागों के अध्यक्ष एवं वैज्ञानिक मौजूद रहे।

उद्घाटन सत्र के दौरान विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान डॉ. पी. के. सिंह ने अतिथियों का स्वागत कर बैठक दौरान विभिन्न शोध कार्यों का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय द्वारा विभिन्न शोध क्षेत्रों में 456 शोध परियोजनाओं की स्वीकृति प्रदान की गई, जिसमें से 169 परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी है।

इन परियोजनाओं की सफलता के कारण विश्वविद्यालय द्वारा 12 विभिन्न फसलों की 29 प्रभेद राज्य के किसानों के लिए विवो चित्त की जा चुकी है। जिसमें मुख्य रूप से अन्न, कई तरह की दाल, सब्जियां एवं फल के प्रभेद शामिल हैं। इस दौरान 55 किसानोन्मुखी तकनीकों का विमोचन कर उनका प्रचार-प्रसार करने की बात कही गई। विश्वविद्यालय में स्थित बौद्धिक संपदा अधिकार को कोषांग की मदद से कई किसानों की प्रजातियों को पौधा संरक्षण एवं किसान प्राधिकार नई दिल्ली के अंतर्गत संरक्षित कराए जाने की भी जानकारी दी गई।

ऐसे कुछ किसानों को परिषद के उद्घाटन सत्र में प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. शशिकांत ने बताया कि बैठक के दौरान जिन किसानों को सम्मानित किया गया, उनमें सत्यदेव सिंह, आलोक कुमार, आनंद मोहन सिंह और विवेकानंद सिंह शामिल है। सह निदेशक अनुसंधान डॉ. फ़िज़ा अहमद ने पिछली शोध परिषद पर आधारित कार्यान्वयन प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जबकि इसके बाद जोन 3A, एवं 3B की क्षेत्रीय शोध सलाहकार समिति की बैठक का प्रतिवेदन बिहार कृषि महाविद्यालय सबौर के प्राचार्य डॉ. एस. एन. सिंह, ए. आर. आई. पटना के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. रणधीर कुमार एवं मंडल भारती कृषि महाविद्यालय अगवानपुर सहरसा के प्राचार्य डॉ. उमेश सिंह ने प्रस्तुत किया। इधर मौसम संबंधी पूर्वानुमान का प्रतिवेदन सस्य विज्ञान विभाग के डॉ. सुनील कुमार ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन जैव प्रौद्योगिकी विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. धर्मशिला ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन विश्वविद्यालय के उप निदेशक अनुसंधान डॉ. शैल वाला ने किया।

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