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बांग्ला विधि से पूजा होनेवाले दुर्गा मंदिरों में वेदी पर चढ़ाई गई मां दुर्गा की प्रतिमा, नवरात्र के पांचवे दिन स्कंदमाता और मां कात्यायनी की हुई पूजा….

 रिपोर्ट- रवि शंकर सिन्हा  

सिल्क टीवी/भागलपुर (बिहार): शारदीय नवरात्र के पांचवे दिन माँ दुर्गा के पंचम और षष्टम स्वरुप देवी स्कन्दमाता एवं माँ कात्यायनी की पूजा अर्चना धूमधाम से की गई। सोमवार को भागलपुर के अधिकतर बांग्ला पूजा पंडालों में विधि विधान से वैदिक मंत्रोच्चार एवं दुर्गा सप्तशती पाठ के बीच माता मंदिर का पट खोल दिया गया, जहां काफी संख्या में बांग्ला पद्धति से पूजा करने वाले भक्तों ने माँ दुर्गा के पंचम और षष्टम स्वरुप स्कन्दमाता और कात्यायनी देवी की भक्ति भाव के साथ पूजा अर्चना की।

आपको बता दे कि स्कन्दमाता यश बल धन और सुख समृद्धि के साथ संतान सुख भी प्रदान करती हैं। इनके चार भुजाओं में से एक भुजा में उन्होंने अपने पुत्र स्कन्द को गोद में लिया है, जिन्हें कार्तिकेय के नाम से जाना जाता है, और कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है।

स्कन्दमाता सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं, जिनकी पूजा पीले फूल, फल आदि सामग्रियों से किया जाता है, और सच्चे मन से पूजा करने वालों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। जबकि माँ के छठे स्वरुप माता कात्यायनी का प्रादुर्भाव दैत्यराज महिषासुर के अत्याचार अत्यधिक बढ़ जाने के कारण सभी देवताओं ने ब्रम्हा, विष्णु और भगवान् शिव के पास आकर सारी स्थिति बताई तो क्रोधित त्रिदेव के अंश से माता कात्यायनी प्रकट हुई, और कात्यायन ऋषि के नाम पर इन्हें कात्यायनी नाम से इनकी ख्याति हुई।

इसके बाद माता कात्यायनी ने महिषासुर का वध कर जगत को अत्याचारी दानव के अत्याचार से मुक्ति दिलाई। वहीं भागलपुर के काली बाड़ी, दुर्गा बाड़ी, प्रधान डाकघर, मारवाड़ी पाठशाला परिसर समेत बांग्ला विधि से पूजा होनेवाले मंदिरों में माता के दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचे, और पूरा मंदिर परिसर शेरावाली माता के जयकारे से गूंजता रहा।

हर ओर सप्तशती पाठ, मंत्रोच्चार, और भक्ति गीतों से माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो गया है। बता दें कि कोविड 19 महामारी के कारण जहां पिछले वर्ष सरकार और प्रशासन की ओर से दुर्गा पूजा समेत सार्वजनिक रूप से आयोजित होने वाले तमाम धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों पर रोक लगा दी थी।

लेकिन पिछले कुछ महीनों में महामारी के संक्रमण में आयी कमी के कारण सरकार और जिला प्रशासन की अनुमति के अनुसार कोविड सावधानियों को ध्यान में रखते हुए हर्षोल्लास के साथ नवरात्र और सार्वजनिक पूजा समारोह का आयोजन किया जा रहा है।   

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