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देशों में इस Corona संक्रमण के कारण लाखों लोग अपनी जान गवां चुके

आप पिछले डेढ़ वर्षो से Corona महामारी का नाम सुनते आए हैं और देखते ही देखते ना सिर्फ भारत बल्कि दुनिया के कई देशों में इस Corona संक्रमण के कारण लाखों लोग अपनी जान गवां चुके हैं। बात WHO की करें या भारत समेत दुनिया के कई देशों की। सभी देशों की सरकारें इस महामारी से बचाव और पार पाने के लिए जद्दोजहत कर रही है। काफी प्रयास और वैज्ञानिक शोध के बाद भारत समेत कई देशों में Corona महामारी से बचाव और लड़ने के लिए वैक्सीन तैयार तो कर ली गई, लेकिन भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में सभी नागरिकों का वैक्सीनेशन करना एक बड़ी चुनौती बन गई है, जिसका खामियाजा आज भी Covid 19 के मरीजों को अपनी जान गवांकर चुकाना पड़ रहा है। जैसा की कहा जाता है कि Covid 19 महामारी की शुरुआत हमारे पड़ोसी देश चीन के वुहान से वर्ष 2019 में हुई थी, और इसके बाद इटली, स्पेन, अमेरिका, ब्राजील समेत दुनिया के कई देशों के साथ इस वायरस ने भारत में भी पांव पसारना शुरू कर दिया, और देखते ही देखते देश के सभी राज्यों और कस्बों तक पहुंच गया। इस बीमारी के तेजी से फैलाव और भयावहता को देखकर वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन ने Covid 19 को महामारी घोषित कर दिया। जिसे कोरोना काल कहा जाने लगा। दरअसल कोरोनाकाल का शाब्दिक अर्थ कोरोना महामारी का समय है। जब से दुनिया भर में Corona महामारी का प्रकोप छाया है, तब से करोड़ो की संख्या में लोग इसकी चपेट में आ चुके है, जबकि लाखों लोग कोरोना रूपी काल के गाल में समा गए। कोरोना महामारी ने ना जाने कितने बच्चों को अनाथ कर दिया, कितनी मांग सूनी कर दी, कितने ही गोद उजड़ गए, कितनों के बुढ़ापे का सहारा छीन गया, कितने भाइयों की कलाई सूनी कर दी, कितने ही बहनों से उनके भाई छीन लिया और ना जाने आपसी बातों को सांझा करने वाले कितने ही मित्र और शुभचिंतकों को लील लिया। जैसा की विशेषज्ञों का कहना है और देखा भी जा रहा है की इस वर्ष आए Corona महामारी का स्ट्रेन अधिक खतरनाक है और तेजी से इसके रूप एवम् लक्षणों में बदलाव होने के कारण अधिक संख्या में लोग संक्रमण का शिकार हो रहे हैं, जिसमें पिछले वर्ष की तुलना अधिक लोगों की मौत भी हो रही है। जो सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। इधर बात अगर बिहार की करें तो Covid 19 की दूसरी लहर में सबसे ज्यादा मौत बिहार की राजधानी पटना में हुई, जबकि भागलपुर में भी Corona संक्रमितों की रफ्तार काफी तेजी से बढ़ रही हैं। जिससे जिले में मौत का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है। हालांकि अगर स्वास्थ्य विभाग और सरकारी आंकड़े को देखा जाए, तो यह वास्तविकता से बिलकुल भी मेल नहीं खाता है। जिससे सरकार की व्यवस्था और बदइंतजामी पर सवाल लगातार खड़े हो रहे हैं। वर्तमान में कोविड से होनेवाली मौत में भागलपुर दूसरे स्थान पर है। Corona वायरस की त्रासदी को देखते हुए पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी सरकार ने भागलपुर के मायागंज स्थित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज अस्पताल को कोविड अस्पताल घोषित किया है, जहां 700 बेड कोविड मरीजों के इलाज के लिए तैयार होने की बात कही जाती है। भागलपुर के कोविड अस्पताल में अबतक करीब डेढ़ सौ कोरोना मरीज की मौत हुई है। हालांकि इन मौत के पीछे केवल Corona महामारी नहीं बल्कि हमारे अस्पताल की व्यवस्था और सिस्टम की खामियां भी है। रवि शंकर सिन्हा और उस मौत के पीछे का कारण अस्पताल में ऑक्सीजन के लो प्रेशर से आपूर्ति माना जा रहा है। अलग बात है कि भागलपुर के डीएम सुब्रत कुमार सेन व्यवस्था को दुरुस्त करने की बात करते हैं, लेकिन जवाब टालमटोल कर दे रहे हैं।ऑक्सीजन की कमी से मौत के सरकारी आंकड़े बताएं तो पिछले 24 अप्रैल से 7 मई तक तकरीबन 100 से ज्यादा कोविड मरीज की मौत हुई है। और अगर गैर सरकारी आंकड़े की बात करें तो भागलपुर के बरारी शमशान घाट के विद्युत शवदाह गृह के रजिस्टर और गंगा किनारे जलाये जा रहे लाश की संख्या 400 से ज्यादा है, जो डोम राजा और विद्युत शवदाह के संचालकों के कहे अनुसार है।पूर्वी बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल जेएलएन अस्पताल मायागंज में भागलपुर समेत 6 ज़िलों के कोविड मरीज भर्ती हैं। और कोरोना मरीजों की मौताें का सिलसिला भी जारी है। पिछले एक माह में सरकार ने इस कोरोना डेडिकेटेड अस्पताल में 100 मरीजों की मौत बताई है। इनमें 85-90 मरीजों की मौतों का कारण शरीर में ऑक्सीजन की कमी बताई गई है। पांच मई को मायागंज अस्पताल में 14 मरीजों की मौत हुई। इनमें भी मौतों का कारण ऑक्सीजन बताया गया। इन सबके बीच अस्पताल प्रबंधन का पर्याप्त ऑक्सीजन मिलने का दावा भी दम तोड़ता नजर आ रहा है।एक ओर परिजनों का बेहतर इलाज न होने की शिकायत और दो दिन पहले दो डॉक्टर की पिटाई व तोड़फोड़ की घटना भी ऑक्सीजन न मिलने के आरोप में की गई। जाहिर सी बात थी कि मरीजों को जितनी मात्रा में ऑक्सीजन मिलनी चाहिए, नहीं मिली। उनका शरीर धीमी ऑक्सीजन सप्लाई को जरूरत के मुताबिक नहीं खींच सका और मौत हो गई। अस्पताल में पाइप से मरीजों के बेड तक ऑक्सीजन सप्लाई करने वाले ठेकेदारों ने 11 की बजाय महज 3 कर्मचारी रखे हैं। वे ठीक से सप्लाई की निगरानी नहीं कर पा रहे। आइसोलेशन वार्ड, आईसीयू, इमरजेंसी आदि में अभी भी 60 प्रतिशत बेडों पर सही तरीके से ऑक्सीजन नहीं मिल रहा है।भागलपुर के डीएम सुब्रत कुमार सेन कहते हैं किऑक्सीजन लेवल घटने से मरीजों की मौत की बड़ी वजह देरी से एडमिट होना भी है। मरीजाें की स्थिति कंट्रोल से बाहर हाेने पर परिजन उन्हें एडमिट कराते हैं।बाइट – सुब्रत कुमार सेन, डीएम, भागलपुर।

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