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टीएमबीयू में बनेगा पालना घर और ब्रेस्ट फीडिंग रूम, रजिस्ट्रार ने कहा बच्चों को प्री-स्कूल जैसी मिलेगी सुविधाएं

रिपोर्ट – सैयद ईनाम उद्दीन

सिल्क टीवी/भागलपुर (बिहार) : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को लेकर तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय में कार्यरत महिला कर्मियों के लिए अच्छी खबर है। विश्वविद्यालय प्रशासन अब यहां कार्य करने वाली महिलाओं के अलावा जरूरी काम से यूनिवर्सिटी आने वाली महिलाओं को पालना घर और ब्रेस्ट फीडिंग रूम की सुविधा देने की तैयारी कर रहा है।

सब कुछ ठीक ठाक रहा तो जल्द ही कामकाजी महिलाएं अपने छोटे बच्चों के साथ कार्यालय आ सकेंगी।उल्लेखनीय है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2017 में लोक संवाद कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ताओं की मांग एवं नारी सशक्तीकरण योजना के तहत कामाकाजी महिलाओं के पांच वर्ष तक के छोटे बच्चों को

कार्यस्थल के आसपास उचित देखभाल के उद्देश्य से पालना घर की स्थापना और संचालन की स्वीकृति दी थी। तब सीएम ने कहा था कि पालना घर एक ऐसी सुविधा है जिसमें कामकाजी महिला अपने पांच वर्ष या उससे कम उम्र के बच्चों को अपने कार्य के दौरान छोड़कर जाती हैं। जहां बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए उचित वातावरण उपलब्ध होता है।

इधर टीएमबीयू में कार्यरत महिला कर्मियों ने भी सुप्रीम कोर्ट की तर्ज पर विश्वविद्यालय परिसर में छोटे बच्चों के लिए पालना घर और ब्रेस्ट फीडिंग रूम बनाने की मांग की है। क्योंकि पालना घर बन जाने से 6 माह से 5 वर्ष के बच्चों की देखभाल उनके नज़रों के सामने होगी। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. निरंजन प्रसाद यादव ने कहा कि प्रशासनिक भवन परिसर में पालना घर और ब्रेस्टफीडिंग रूम जरुरी है। उन्होंने बताया कि जब तक विश्वविद्यालय में पालनाघर या ब्रेस्टफीडिंग रूम नहीं बना है, तब तक महिला कर्मी उनसे परमिशन लेकर बच्चों को फीडिंग कराने के लिए घर जा सकती हैं।

रजिस्ट्रार ने कहा कि हमलोग विश्वविद्यालय में ऐसा पालनाघर बनाना चाहते हैं, जिसमें बच्चों को प्री-स्कूल की सारी सुविधाएं मिल सके। साथ ही कहा कि बेबी फीडिंग रूम निर्माण को लेकर कुलपति प्रो . हनुमान प्रसाद पांडे और अन्य अधिकारियों से बात की जाएगी। जबकि टीएमबीयू के सीनेट सदस्य मुजफ्फर अहमद ने कहा कि विश्वविद्यालय में पालना घर और ब्रेस्ट फीडिंग रूम की सुविधा होनी चाहिए। क्योंकि यह महिलाओं के सम्मान और अधिकार की बात है।

मुजफ्फर अहमद ने बताया कि मां का दूध बच्चे के लिए अमृत समान है। इसलिए हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई में ये बात साफ कर दी कि बच्चे को ब्रेस्टफीडिंग कराना मां का अधिकार है। जिसे कोई रोक नहीं सकता। बता दें कि ब्रेस्टफीडिंग रूम की सुविधा उपलब्ध कराने वाला पहला भारतीय स्मारक ‘ताज महल’ था।

लेकिन सवाल यह उठता है कि देश में सरकारी कार्यालय, सार्वजनिक भवनों, मॉल, शॉपिंग सेंटर, सिनेमा हॉल, बस टर्मिनल, हवाई अड्डों, रेलवे स्टेशन जैसी जगहों पर अक्सर महिलाओं का आना-जाना लगा रहता है, इसके बावजूद सेफ और आराम से ब्रेस्टफीडिंग करवाने के लिए उस हिसाब से इंफ्रास्टक्टर तैयार नहीं किया गया ?

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