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ज्योतिबा फुले का मनाया गया 131वां परिनिर्वाण दिवस, वक्ताओं ने कहा महात्मा ने आजीवन महिला सुधार और दलितों के उत्थान के लिए किया संघर्ष….

रिपोर्ट – सैयद ईनाम उद्दीन

सिल्क टीवी/भागलपुर (बिहार) :आधुनिक भारत के निर्माता महात्मा ज्योतिबा फुले के परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर सोमवार को संगोष्ठी का आयोजन किया गया। बिहार फुले अम्बेडकर युवा मंच के बैनर तले आयोजित कार्यक्रम तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के पीजी अम्बेडकर विचार एवं समाज कार्य विभाग में सम्पन्न हुआ।

इसके पूर्व अम्बेडकर विचार विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विलक्षण रविदास, डॉ. संजय रजक, डॉ. विष्णुदेव दास समेत संस्था से जुड़े लोगों ने ज्योतिबा राव फुले के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया।

वहीं बिहार फुले अम्बेडकर युवा मंच के प्रदेश अध्यक्ष अजय राम और प्रदेश महासचिव सार्थक भरत ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा राव फूले ने देश में महिला शिक्षा की शुरुआत कर अपनी धर्मपत्नी को देश की प्रथम शिक्षिका बनाया। साथ ही सभी जाति, धर्म और समुदाय के लोगों को पढ़ने के लिए अनेकों स्कूल खोलें। बालिका कन्या विद्यालय की शुरुआत की।

अजय राम ने कहा कि महात्मा ज्योतिबा जीवन भर शोषितों, पीड़ितों, दलितों के अत्याचार के विरूद्ध और अंधविश्वास के खिलाफ लड़ते रहे। परिचर्चा में प्रो. विलक्षण रविदास ने ज्योतिबा फुले और भारतीय संविधान विषय पर अपने विचार रखे। इस दौरान उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षा और सामाजिक अधिकार दिलाने के लिए महात्मा ज्योतिबा राव फुले एवं सावित्री बाई ने आजीवन संघर्ष किया।

कार्यक्रम में बिहार फुले अम्बेडकर युवा मंच के संरक्षक विलक्षण रविदास ने बताया कि बहुजन समाज के महानायक महात्मा ज्योतिबा फुले का जन्म 11अप्रैल, 1827ई. में हुआ था और आज उनका 131वां परिनिर्वाण दिवस है। जबकि डॉ. संजय रजक ने कहा कि ज्योतिराव गोविंदराव फुले 19वीं सदी के महान समाजसुधारक, विचारक, समाजसेवी, लेखक और दार्शनिक थे।

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