Home धर्म जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाई गई बिरसा मुंडा की जयंती

जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाई गई बिरसा मुंडा की जयंती

रिपोर्ट – रवि शंकर सिन्हा

सिल्क टीवी भागलपुर (बिहार) :भागलपुर के नाथनगर नरगाकोठी स्थित पूरणमल सावित्री देवी बाजोरिया सरस्वती शिशु मंदिर प्रांगण में सोमवार को बिरसा मुंडा की जयंती जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाई गई। इस दौरान विद्यालय परिवार समेत छात्र छात्राओं ने जनजातीय गौरव दिवस पर बिरसा मुंडा को याद करते हुए नमन किया। कार्यक्रम की शुरुआत भागलपुर विभाग के विनोद कुमार एवं विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य जितेंद्र प्रसाद ने दीप प्रज्वलित कर किया।

वहीं अपने सम्बोधन में विनोद कुमार ने कहा कि बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को रांची जिले के उलीहातू गांव में हुआ था, और हिंदू और ईसाई दोनों धर्म की शिक्षा उन्होंने प्राप्त की थी। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने अपने छोटे से जीवन में अंग्रेजों के खिलाफ आदिवासियों को एकत्रित कर विद्रोह का सूत्र तैयार कर लिया और उन्हें अपनी आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया। बिरसा हमेशा अपनी संस्कृति और धर्म को बचाना और बरकरार रखना चाहते थे। जिसके कारण आज भी बिरसा मुंडा को न केवल झारखंड में बल्कि आदिवासी समाज और राष्ट्र के नायक के रूप में देखा जाता है। साथ ही कहा कि बिरसा मुंडा के जीवन से हमें साहस शौर्य एवं सेवा की सीख मिलती है।

इधर प्रभारी प्रधानाचार्य जितेंद्र प्रसाद ने कहा कि बिरसा मुंडा एक पढ़े-लिखे युवा नेता थे, जिन्होंने कई उद्देश्य को लेकर आंदोलन की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा कि वे जमींदारों और ठेकेदारों के अत्याचार से आदिवासियों को मुक्ति दिलाना चाहते थे, जिसके कारण समाज ने उन्हें अपना भगवान मान लिया, और उनका प्रत्येक शब्द मुंडाओं के लिए ब्रह्मवाक्य बन गया था। इसके अलावा कार्यक्रम प्रमुख शशि भूषण मिश्र ने बताया कि जनजातीय गौरव दिवस 15 से 22 नवंबर तक मनाया जाएगा, जिसमें विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम सम्मिलित हैं। इस अवसर पर मनोज तिवारी, अंजू रानी, सुबोध झा, सुप्रिया कुमारी, अमर ज्योति, गोपाल प्रसाद सिंह समेत कई शिक्षक शिक्षिका और काफी संख्या में छात्र छात्रा मौजूद रहे। 

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