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चांगसारी (असम) में 50 हजार मेट्रिक टन का क्षमता का साइलो गोदाम राष्ट्र को समर्पित: अश्विनी चौबे

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन तथा उपभोक्ता मामले खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने आज चांगसारी (असम) में 50 हजार मेट्रिक टन का क्षमता का साइलो गोदाम राष्ट्र को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी का “उत्तर पूर्वी राज्यों को विशेष सुविधा देने और भडारंण कमी (gap) को पूरा करने के कार्यक्रम” के तहत यह हुआ है।

इस कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा सहित एफसीआई के वरीय अधिकारियों और राज्य खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारियों की भी उपस्थिति रही।

साइलो गोदाम राष्ट्र को समर्पित करने के बाद संबोधन में केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के 135 करोड़ लोगों के खाद्य सुरक्षा के प्रति सर्वाधिक जागरूक कराते हुए लगातार प्रयास करते रहे हैं। इन्हीं प्रयासों के फलस्वरुप कोविड महामारी की विषमताओं के बावजूद हम ना सिर्फ देश के लगभग 80 करोड़ जनता में उनके नॉर्मल आवंटन अनुसार खाद्य आपूर्ति करते रहे बल्कि जनता को राहत पहुंचाने के लिए प्रति लाभुक 15 माह के लिए अतिरिक्त 5 किलो खाद्यान्न बिल्कुल मुफ्त देने के लिए आवंटन किया I इस योजना के अंतर्गत 596 लाख मेट्रिक टन अतिरिक्त खाद्यान्न आवंटित किया गया I

उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा को और प्रबल करने के लिए देश के प्रत्येक राज्यों में भंडारण गैप (gap) की गणना अनुसार आगारो का निर्माण किया जा रहा है ताकि एक निश्चित परिमाण में खाद्यान्न उपलब्ध रहे I खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए थोक खाद्यान्न भंडारण सुनिश्चित करने के लिए पूर्वोत्तर राज्यों के लिए भंडारण गैप(gap) की गणना के मानदंड चार महीने के बजाय छह महीने तक बढ़ा दिए गए हैं। इसी क्रम में असम राज्य में भी भारतीय खाद्य निगम की भंडारण क्षमता 2015 में जो लगभग 3.18 LMT(लाख मीट्रिक टन) थी जो बढ़कर अब 2020-21 में 5.34 LMT (लाख मीट्रिक टन) कर दिया है l

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भण्डारण में हम आधुनिकरण की तरफ बढ़ रहे हैं । इसके लिए हम हब और स्पोक माडल पर साईलो का निर्माण करने वाले हैंI अखिल भारतीय स्तर पर 108 लाख मीट्रिक टन साइलो के निर्माण के लिए अनुमति दे दी गयी है l इसी के अंतर्गतचांगसारी में हमने 50 हजार मेट्रिक टन का साइलो गोदाम आज राष्ट्र को समर्पित किया है। यह राज्य एवं आस-पास के क्षेत्रों और राज्यों में भडारंण कमी (gap) को पूरा करने के लिए अच्छी संबंद्धता के साथ रणनीतिक रूप से स्थित है। असम उत्तर-पूर्वी राज्यों के प्रवेश द्वार(gateway) के रूप में कार्य करेगा।

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