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ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने नालंदा में दो दिवसीय आजादी का अमृत महोत्सव फोटो प्रदर्शनी का किया शुभारंभ

पटना : देश की आजादी के महान स्वतंत्रता सेनानियों व नायकों को याद करने और नई पीढ़ी को इनके बारे में बताने के उद्देश्य से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के रीजनल आउटरीच ब्यूरो, पटना द्वारा नालंदा स्थित महाबोधि महाविद्यालय (बीएड) कॉलेज में आज आजादी का अमृत महोत्सव फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। इस दो दिवसीय फोटो प्रदर्शनी का उद्घाटन बिहार सरकार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने किया। कार्यक्रम में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के निदेशक विजय कुमार एवं क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी पवन कुमार सिन्हा, राजगीर की अनुमंडल पदाधिकारी अनिता सिन्हा उपस्थित थे।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि आज के इस डिजिटल युग में फोटो प्रदर्शनी की अपनी एक अलग महत्ता है। उन्होंने कहा कि आज हम लोग आजाद भारत के नागरिक हैं, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि किनकी कुर्बानियों और शहादतों के बाद हमें यह आजादी मिली है। उन नायकों और स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने और उनके बारे में बताने के लिए ही इस दो दिवसीय फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। उन्होंने कहा कि यह बेहद कम लोगों को मालूम होगा कि गांधीजी बिहार में 1917 से लेकर 1947 तक लगभग 27 बार आए थें। इस फोटो प्रदर्शनी में कई ऐसे दुर्लभ तस्वीरें लगाई गई हैं, जो बच्चों को और उनके अभिभावकों को जरुर देखना चाहिए और उनसे सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वस्थ रहना आज की सबसे बड़ी चुनौती है। जिस प्रकार प्रदूषण दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, लोगों में स्वास संबंधी बीमारियां अधिक हो रही हैं। उन्होंने कहा कि जहां देशभर में 33% हरियाली है, वहीं बिहार में 15% है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण ही पशु-पक्षियों सहित मनुष्यों में इसके दुष्प्रभाव देखने को मिल रहे हैं। हमें अपने हरियाली के लक्ष्य को बढ़ाकर 17% करना है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के निदेशक विजय कुमार ने कहा कि आज हम जिनकी वजह से खुली हवा में सांस ले रहे हैं, उनको याद करने के लिए यह अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। उन्होंने नालंदा के दो स्वतंत्रता सेनानियों – श्याम नारायण सिंह और मौलाना सैयद अरशद मदानी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल देश की आजादी में अपनी महत्ती भूमिका निभाई बल्कि वे राष्ट्रीय कौमी एकता के भी प्रतीक हैं, जिन्होंने लोगों को एकता में पिरोने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि हमें देश में ही निर्मित बुनकरों के वस्त्रों व सामानों का इस्तेमाल करना चाहिए इससे लोकल फॉर वोकल और आत्मनिर्भर भारत को बल मिलेगा।

नव नालंदा महाविहार के संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विजय कुमार कर्ण ने कहा कि हमें अपने स्वतंत्रता सेनानियों, महानायकों के आदर्शों और जीवन से सीख लेने और उसे आत्मसात करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की समाज के प्रति अपनी एक जिम्मेदारी होती है और हर व्यक्ति को समाज में अपनी सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा पहली बार देखने को मिल रहा है जब देश के नायकों को एक जगह फोटो के माध्यम से बताने और समझाने की कोशिश नई पीढ़ी के लिए की जा रही है। निसंदेह एक सार्थक पहल है।

कार्यक्रम स्थल पर मुफ्त टीकाकरण के लिए स्टॉल की भी व्यवस्था की गई थी। साथ ही यहां हथकरघा का भी एक स्टॉल लगाया गया था। इसके साथ ही मंत्रालय के पंजीकृत सांस्कृतिक दल के कलाकारों ने लोकगीत और नाटक का मंचन किया।

मौके पर महाबोधि महाविद्यालय नालंदा के प्राचार्य डॉ अरविंद कुमार, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सहायक क्षेत्रीय प्रचार अधिकारी सर्वजीत सिंह एवं अमरेंद्र मोहन सहित कॉलेज के शिक्षक और छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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पप्र

(प्रेस विज्ञप्ति)

पत्र सूचना कार्यालय
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय
भारत सरकार, पटना

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