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कृषि यंत्रो की मरम्मति के लिए BAU में किया प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन, किचन गार्डेन से महिलाएं रखेंगी परिवार के पोषण सुरक्षा का ध्यान….

रिपोर्ट – रवि शंकर सिन्हा

सिल्क टीवी भागलपुर (बिहार) : बिहार कृषि विश्वविद्यालय और आइसीएआर अटारी के संयुक्त तत्वाधान में शुक्रवार को पोषण संवेदी कृषि संसाधन एवं नवोन्मेशण पर ऑन लाइन प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। जिसमें बिहार.झारखंड के कृषि विज्ञान केंद्रों के गृह वैज्ञानिक एवं एसएमएस जुडे। इस दौरान कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि गृह वाटिकाओं में महिलाएं अपनी मेहनत से इम्यूनिटी की हरियाली बढाएंगी, जिसका मकसद होगा, परिवार की पोषण सुरक्षा के लिए तीनों मौसम में विविधि प्रकार की हरी सब्जियों के साथ पपीता, अमरूद एवं नींबू जैसे फलों को उगाना, ताकि घर के बच्चों और बूढों के साथ अन्य सदस्यों को भरपूर भोजन से पोषक तत्व मिल सके।


प्रशिक्षण के उदघाटन सत्र में बीएयू के निदेशक प्रसार शिक्षा डाॅ आर के सोहाने ने अतिथियों का स्वागत किया और कार्यक्रम की विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि राज्य में कुपोषण से जंग को लेकर आइसीडीएस के सहयोग से पूर्णिया, खगडिया, नालांदा और पटना जिले में आंगनबाडी केंद्रों को चिन्हित कर पोषण वाटिका का निर्माण कराया गया, जहां वाटिका में उत्पादित फल-सब्जियों को केंद्र के बच्चों के थाली में परोसा गया। पोषक क्षेत्र के गर्भवती एवं धातृ महिलाओं को भी सब्जी, फल एवं मशरूम उपलब्ध कराए गए। इन पौष्टिक चीजों के सेवन से न सिर्फ उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ, बल्कि वे अपने गृह वाटिका में भी पोषण वाटिका निर्माण को आगे आई। जिससे इस कार्यक्रम के सफलता की सराहना देश स्तर पर हुई, और बिहार के सभी जिलों में सरकार इसे लागू कर रही है।

इसके लिए प्रत्येक जिले के पांच आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषण वाटिका शुरू करने की तैयारियां चल रही है। ताकि लोग अपनी पोषण सुरक्षा के पति जागरूक हो सकें, और यह राज्य कुपोषण मुक्त राज्य बन सके। आइसीएआर अटारी पटना के निदेशक डाॅ अंजनी कुमार ने कहा कि इस योजना को सभी आंगनबाडी केंद्रों में लागू करना है। ताकि केंद्र के माॅडल पोषण वाटिका को देख पोषक क्षेत्र के लोग भी जागरूक हो सके। लेकिन इसकी सतत निगरानी करने की जरूरत है। गार्डेन में तीनों मौसम में फल सब्जियों का कितना उत्पादन हुआ और इससे कितने लाभान्वित हुए इसका हिसाब रखना भी आवश्यक होगा, जिससे हम योजना से होने वाले लाभ को प्रमाणित कर सकें।


कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आइसीडीएस के निदेशक अलोक कुमार ने कहा कि यह योजना भारत सरकार द्वारा संचालित हो रहा है। सात हजार आंगनबाडी केंद्रों में यह पोषण वाटिका बनाने की योजना है, जिसे वैज्ञानिक रूप से डिजाइन किया जाएगा। योजना के सफल संचालन में आंगनबाडी केंद्रों को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे, और कोई कठिनाई नहीं होने दी जाएगी। उदघाटन सत्र में धन्यवाद ज्ञापन बीएयू के सह निदेशक प्रसार शिक्षा डाॅ आरएन सिंह ने किया।


इधर प्रशिक्षण के तकनीकी सत्र में कृषि विज्ञान केंद्र बाढ की वरीय वैज्ञानिक डाॅ कुमार  शारदा ने खाद्य एवं पोषण सुरक्षा में महिलाओं की भूमिका एवं क्षमता संवर्धन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। पूर्वी चंपारण केवीके के प्रधान डाॅ अभिशेक प्रताप सिंह ने पोषण वाटिका में वर्ष भर फल सब्जियों का कैसे उत्पादन एवं प्रबंधन करे इसके बारे में बताया। वहीं खगडिया केवीके की वरीय वैज्ञानिक डाॅ अनिता ने पोषण वाटिका निर्माण में आने वाली समस्याओं एवं उसके निराकरण की जानकारी दी।

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