Home राष्ट्रीय आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान का सज्जादानशीन ने किया स्वागत

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान का सज्जादानशीन ने किया स्वागत

रिपोर्ट – सैयद ईनाम उद्दीन

सिल्क टीवी/भागलपुर (बिहार) : सैयद शाह फखरे आलम हसन ने कहा कि जो देश से सही मायनों में प्रेम रखता है और देश की अच्छाई, तरक्की और उन्नति के लिए उसके दिल में फिक्र है और वह उसके लिए कुछ करना चाहता है तो वह हमेशा एकता की अखंडता की भाईचारे की सद्भावना की बात करेगा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को देश से प्रेम नहीं है जो लोग स्वार्थी हैं सिर्फ कुर्सी चाहते हैं तो वह अंग्रेज की छूटी हुई पॉलिसी डिवाइड एंड रूल को अपनाकर यहां राज करना चाहते हैं। ख़ानक़ाह पीर दमड़िया के 15वें सज्जादानशीन सैयद शाह फखरे आलम हसन ने कहा कि भारत की आजादी के लिए जब हिंदू मुसलमान और तमाम जाति के लोगों ने मिलकर एक साथ संघर्ष शुरू किया तो अंग्रेजों की बड़ी ताकत को भारत छोड़कर जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि देश के तमाम समुदायों को साथ लेकर पूरी एकता और अखंडता के साथ भारत का निर्माण करना होगा। भारत को आगे बढ़ाने में सबको साथ लेकर चलना होगा।

सैयद शाह फखरे आलम हसन ने कहा कि जगह जगह पर मोहब्बत का पैगाम देने के लिए प्रोग्राम किए जाने चाहिए। इससे एकता को बल मिलेगा। ख़ानक़ाह पीर दमड़िया के 15वें सज्जादानशीन और वक़्फ़ संख्या 159 के मुतवल्ली सैयद शाह फखरे आलम ने कहा कि आरएसएस देश का एक प्रतिष्ठित संगठन है। अगर संगठन प्रमुख मोहन भागवत की तरफ से एकता की अखंडता की बात की जा रही है तो ऐसे लोगों को जो नफरत फैला रहे हैं या नफरत का जहर अपने मुंह से उगल रहे हैं उन लोगों को सोचना होगा। उन्होंने आरएसएस और बीजेपी के नेताओं से अपील करते हुए कहा कि इस तरह के नफरत फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करें चाहे वह किसी मजहब किसी जाति या किसी धर्म के हो। उस पर सीधी कार्रवाई होनी चाहिए। ख़ानक़ाह पीर दमड़िया शाह के 15वें सज्जादानशीन सैयद शाह फखरे आलम हसन ने कहा कि ईश्वर सब देख रहा है उसको न्याय पसंद है। किसी को कुर्सी दी गई है यह ऊपर वाले की कृपा है। अल्लाह के फजल से कोई कुर्सी पर बैठता है अगर वह उसका दुरूपयोग करेगा और अन्याय करेगा तो अन्याय ज्यादा दिन चलता नहीं है, क्योंकि वक्त कभी आता है कभी जाता है। हाकिम आते हैं चले जाते हैं। उनका नाम और उनका कार्य याद किया जाता है। अगर उन्होंने एकता के लिए देश हित में काम किया है तो जाहिर है कि उन को सराहा जाएगा और उनका नाम लिया जाएगा। और किसी ने अगर उनकी राजनीति की है और मुसलमान और हिंदुओं को और समुदायों के बीच में दीवार पाटी है तो उसी के लिए उन्हें याद किया जाएगा।

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