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अच्छी पहल: टीएमबीयू के पीजी जूलॉजी विभाग में तैयार हुआ एक्वापोनिक्स लेबोरेटरी, 52 प्रजाति की डाली गई मछलियां

रिपोर्ट – सैयद ईनाम उद्दीन

सिल्क टीवी/भागलपुर (बिहार) :तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के पीजी जूलॉजी विभाग में सोमवार को एक्वापोनिक्स लेबोरेटरी का उदघाटन डीन साइंस व पीजी जूलॉजी के हेड प्रो. अशोक कुमार ठाकुर ने किया। उदघाटन के मौके पर पीजी जूलॉजी के हेड व साइन्स फैकल्टी के डीन डॉ अशोक कुमार ठाकुर ने कहा कि विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ नवोदिता प्रियदर्शी की यह पहल काफी सराहनीय और काबिलेतारीफ है।

इस लैब का निर्माण हो जाने से विभाग की पहचान और ख्याति और भी अधिक बढ़ जाएगी। इससे शोध कार्यों को काफी बल मिलेगा। उल्लेखनीय है कि एक्वापोनिक्स लेबोरेटरी का निर्माण पीजी जूलॉजी विभाग में बीपीएससी से नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नवोदिता प्रियदर्शी के आर्थिक सहयोग से किया गया। डॉ. प्रियदर्शी इसी विभाग की स्टूडेंट और रिसर्च स्कॉलर भी रही हैं। वर्तमान में वे यहां बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर पदस्थापित हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार ठाकुर की प्रेरणा से डॉ नवोदिता प्रियदर्शी ने आर्थिक सहयोग देकर इसे तैयार कराया है। करीब दो लाख की लागत से बने इस लेबोरेटरी की कई खासियत है। यह पूर्णत मैकेनाइज़्ड एक्वेरियम है। जिसे राज्य से बाहर के टेक्नीशियन ने अत्याधुनिक उपकरणों से तैयार किया है।

टीएमबीयू के पीजी जूलॉजी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ नवोदिता प्रियदर्शी ने बताया कि इस लेबोरेटरी में अठारह हजार लीटर क्षमता वाला एक पानी का टैंक बनाया गया है। स्टोर किये गए इस पानी में लगभग तीन हजार मछलियों का उत्पादन हो सकेगा। मछली पालन के दौरान उससे निकलने वाले उत्सर्जी पदार्थों से पूर्णतः हर्बल और ऑर्गेनिक फलों, सब्ज़ियों और वनस्पतियों का उत्पादन भी होगा। इसे किचन गार्डन के रूप में भी विकसित किया जा सकता है। यह प्रक्रिया सतत चलती रहेगी। जिससे पानी का भी दुरूपयोग नहीं होगा। इस पानी को रिसाइकिल कर पुनः उसे उक्त टैंक में डाला जाएगा। इस लैब से उत्पादित होने वाले जैविक फल-सब्जी व वनस्पति का उत्पादन पूर्णतः मिट्टी रहित होगा। एक्वापोनिक्स लेबोरेटरी में अभी रेहू, कतला और गोल्ड फिश सहित अन्य मछलियों की 52 प्रजाति डाली गई है। साथ ही इस लैब में धनिया, बिन्स, गोभी, टमाटर सहित दर्जनों पौधे भी लगाए गए हैं जो मिट्टी रहित उत्पादन कर सकेगा। दरअसल एक्वापोनिक्स पारिस्थितिकी रूप से एक स्थायी मॉडल है जो एक्वाकल्चर के साथ हाईड्रोपोनिक्स को जोड़ता है।

एक्वापोनिक्स में एक ही पारिस्थितिकी तंत्र में मछलियां और पौधे साथ-साथ वृद्धि कर सकते हैं। मछलियों का उत्सर्जी पदार्थ पौधों को जैविक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराता है जो मछलियों के लिए जल को शुद्ध करने का कार्य करता है और इस तरह एक संतुलित इको सिस्टम का निर्माण होता है। एक्वापोनिक्स लेबोरेटरी के उदघाटन के मौके पर टीएमबीयू के पीआरओ डॉ दीपक कुमार दिनकर, विभाग के शिक्षक प्रो. प्रभात कुमार राय, डॉ धर्मशीला, डॉ डीएन चौधरी, डॉ रीतू मिश्रा, डॉ रेणु सिन्हा, दिलीप कुमार ठाकुर सहित विभाग के कर्मी, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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